ग्लास स्किन यानी काँच जैसी चमकदार और बिना दाग-धब्बों वाली त्वचा का ट्रेंड अब सिर्फ युवाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 10 से 14 साल के बच्चे भी इसके पीछे भाग रहे हैं। हर दिन इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर दिखने वाले इन्फ्लुएंसर्स इन मासूम बच्चों को यह यकीन दिला रहे हैं कि सुंदरता का मतलब सिर्फ चमकदार, बेदाग चेहरा है। यही वजह है कि छोटी उम्र में ही बच्चे 8-10 स्टेप्स वाली स्किनकेयर रूटीन फॉलो करने लगे हैं, जिसमें टोनर, सीरम, शीट मास्क और नाइट क्रीम जैसी चीज़ें शामिल हैं।
ग्लास स्किन ट्रेंड: आकर्षण से खतरे तक

कोरियाई ब्यूटी इंडस्ट्री से शुरू हुआ “ग्लास स्किन” ट्रेंड पूरी दुनिया में मशहूर हो गया। पारदर्शी और चमकदार चेहरा देखने में तो आकर्षक लगता है, लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि हर ट्रेंड सुरक्षित नहीं होता।
डॉक्टर्स का कहना है कि इतनी कम उम्र में केमिकल-बेस्ड प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल त्वचा की नैचुरल बैरियर को नुकसान पहुँचा सकता है। यह न केवल एलर्जी और मुहाँसों की वजह बन सकता है, बल्कि आगे चलकर स्किन डिज़ीज़ का भी खतरा बढ़ा सकता है।
क्या सचमुच ज़रूरी है इतना स्किनकेयर
विशेषज्ञ मानते हैं कि 14 साल तक के बच्चों की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है। इस उम्र में उन्हें किसी भी तरह के जटिल स्किनकेयर की आवश्यकता नहीं है। साफ-सफाई, हल्का मॉइस्चराइज़र और धूप से बचाने के लिए सनस्क्रीन ही पर्याप्त है। असली खूबसूरती सीरम और शीट मास्क से नहीं आती, बल्कि हेल्दी लाइफस्टाइल से आती है। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, खेलकूद और पानी का सही सेवन ही बच्चों की त्वचा को स्वाभाविक रूप से हेल्दी और चमकदार बनाता है।
ग्लास स्किन का आकर्षण

सोशल मीडिया और एडवर्टाइजमेंट्स ने यह छवि बना दी है कि बिना दाग-धब्बों वाली त्वचा ही खूबसूरत होती है। फ़िल्टर और एडिटेड वीडियो देखकर बच्चों को लगता है कि उनकी नैचुरल स्किन पर्याप्त नहीं है। यह सोच उनके आत्मविश्वास पर भी असर डाल सकती है।
माता-पिता और समाज की ज़िम्मेदारी
इस ट्रेंड को रोकने और बच्चों को सुरक्षित रखने में माता-पिता की अहम भूमिका है। उन्हें बच्चों को समझाना होगा कि सुंदरता सिर्फ चेहरे की चमक से नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, स्वस्थ आदतों और खुशी से आती है।

शिक्षकों और समाज को भी चाहिए कि बच्चों को यह संदेश दें कि नैचुरल त्वचा भी उतनी ही सुंदर है जितनी किसी स्क्रीन पर दिखने वाली ग्लास स्किन।
निष्कर्ष
ग्लास स्किन का जुनून भले ही देखने में आकर्षक लगे, लेकिन यह बच्चों की नाज़ुक त्वचा और उनके आत्मविश्वास दोनों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। असली सुंदरता फ़िल्टर या महंगे प्रोडक्ट्स से नहीं, बल्कि स्वाभाविक और स्वस्थ जीवनशैली से मिलती है।2
डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। बच्चों की त्वचा से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए हमेशा योग्य डर्मेटोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ से सलाह लेना ज़रूरी ह